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नवनीत सिकेरा आज कैंची पुल सीतापुर की घटना है एक 15 वर्षीय बहन जी स्कूटी से 60 की स्पीड से सनसनाते हुए चुंगी की तरफ से आरही थी जिनका वजन मुश्किल से 25 किलोग्राम रहा होगा। उधर सब्जी मंडी से एक साड़ सड़क की तरफ आ गया , बहन जी ने अपने आपात कालीन ब्रेक यानी अपने पैर सड़क पर रगड़ने सुरु किये लेकिन स्कूटी नही रोक पायी और साइड मे खड़े निम्बू के ठेले मे ठोक दिया और ठेला पलट गया काफी निम्बू बेकार गये ठेला भी टूटा । हद तब हो गयी जब बहन जी उस ठेले वाले पर टूट पड़ी ।ठेले वाला भी विरोध करने लगा चूंकि उसका नुकसान काफी हो गया था। और मैं पहले से वहा निम्बू ले रहा था इस लिए पूरी घटना का चश्मदीद मैं था दोनो की बहस चल रही थी और मैं अन्य सब्जी लेने लगा । इतने मे उस लड़की ने फोने करके 3/4 लोफर टाइप के लड़को को बुला कर उस बेचारे निम्बू वाले की ठुकाई कर दी इसमे भीड़ के कुछ तमासबीनों ने भी साथ दिया। मुझे अफसोस इस बात का है की हमलोग लड़कियो या महिलाओं के मामले मे क्यो एकतरफा हो जाते है । हमेसा पुरुषो या लड़को की गलती नही होती है।
उस बेचारे निम्बू वाले की कोई गलती नही थी।
सारी गलती उस लड़की की थी जिसकी साइकिल संभालने की ताकत नही थी चला स्कूटी रही थी ।
आज कल कुछ महिलायें अपने महिला होने का नाजायज फायदा खूब उठाती है ये किस किस्म की होती है ये लिखना मुश्किल है। दरअसल इन्हें भीड़ का सपोर्ट बिना मांगे मिल जाता है। और झूठी वाहवाही लूटने के लिए ये किसी भी हद तक जा सकती है और किसी भी अच्छे भले इंसान को सारे आम बेइज्जत कर सकती है। ये बड़े लोग भूल जाते हैं कि उस ठेले से उसका पूरा परिवार चलता है ठेला ही उसकी जिंदगी है उस पर ऐसे लात नहीं मारनी चाहिए
सब्जी वाला समझ ही नहीं पा रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हुआ उसके साथ , मैं चाह कर भी मदद नहीं कर पाया , पहले सोचा कि कुछ करूँ फिर सोचा मेरी भी छोटी सी दुकान है कल इन बहन जी ने वहाँ धावा बोल दिया तो मेरी रोजी भी जायेगी , खैर मैंने ठेले वाले के बिखरे निम्बू बटोरने में मदद की , वह बेचारा आँखों में आँसू लिए अपने बिखरे हुए निम्बू उठा रहा था , गाल पर पड़े तमाचों के निशान साफ़ थे , मैंने हिम्मत करके कहा कि भई तेरी तो कोई गलती नहीं थी , वह बोला साब गरीब हूँ गलती किसी की हो पिटेगा तो गरीब ही , ये कहते कहते फफक कर रो पड़ा , कोई देख न ले आँसुओ को अपने गमछे से अपना मुँह ढक लिया