हरियाणा में बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के नाम पर आंकड़ों का खेल चल रहा है। अभियान की उपलब्धि यहीं तक सीमित हो गई है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार को और प्रदेश की अफसरशाही राज्य सरकार को खुश करने में तल्लीन है। सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े खुशनुमा हैं पर स्वास्थ्य विभाग के अपने आॅडिट में कई जिलों में आंकड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर हो गया है। सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के उलट राज्य के किसी जिले में बेटियों की संख्या बढ़ गई है तो किसी में घट गई है। इस मामले में विभागीय जांच अगले हफ्ते शुरू होगी लेकिन खामियां उजागर होनी शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी, 2015 को पानीपत से राष्टÑव्यापी ‘बेटी-बचाओ-बेटी-पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो वर्ष बाद हरियाणा सरकार ने इस बारे में रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट शक के दायरे में है क्योंgender equality in haryanaकि सरकार को खुश करने की कोशिश में आंकड़ों की बाजीगरी स्पष्ट है। वर्ष 2016 में जहां एक हजार लड़कों के पीछे 900 लड़कियों का जन्म होने का दावा किया गया है, वहीं मार्च 2017 में इस जन्म दर औसत को 935 बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है केवल मार्च 2017 में प्रदेश के कई जिलों में लड़कियों के जन्म की औसत 950 रही है।
इन दावों को खारिज करते हुए स्वास्थ्य विभाग और महिला व बाल विकास विभाग के जिलों में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि लड़कियों की संख्या बढ़ा कर दिखाने के फेर में लोगों को जागरूक बाकी करने के बजाए पंजीकरण की प्रक्रिया को ही बदल दिया। फील्ड में तैनात कर्मचारियों ने लड़कियों के पंजीकरण पर जहां पूरा जोर दिया वहीं लड़कों के पंजीकरण में ढिलाई बरती। इसी का नतीजा है कि लिंगानुपात कागजों पर सुधरा दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग की आॅडिट रिपोर्ट के अनुसार जनवरी, 2016 से फरवरी, 2017 तक की अवधि के दौरान फरीदाबाद जिले में जहां 1000 लड़कों के पीछे औसतन 895 लड़कियों का जन्म दिखाया गया है वहीं आॅडिट रिपोर्ट में यह आंकड़ा 872 आया है। इसी तरह सोनीपत जिले में यह औसत 890 बताई गई थी जो आॅडिट में 870 निकली है। गुरुग्राम में स्थिति कुछ उलट है। वहां यह आंकड़ा 881 बताया गया था वहीं आॅडिट में लड़कियों की औसत संख्या 898 सामने आई है। इसी तरह कैथल में जहां उक्त अवधि के दौरान एक हजार लड़कों के पीछे 886 लड़कियों का जन्म बताया गया था वहीं आॅडिट में यह आकड़ा 890 आया है। बहरहाल प्रदेश के सभी जिलों में विभागीय जांच प्रक्रिया चल रही है।
विभाग का सीधा हस्तक्षेप नहीं : विज
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इस पूरे प्रकरण का ठीकरा मुख्यमंत्री कार्यालय में बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ अभियान की निगरानी के लिए चल रहे विशेष प्रकोष्ठ पर फोड़ते हुए कहा कि विभाग का इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं है। रिपोर्ट में खामियों के मद्देनजर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
हरियाणा की साख का सवाल : कविता जैन
महिला व बाल कल्याण मंत्री कविता जैन ने कहा कि यह मामला गंभीर है। लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। जिन्होंने सर्वे किया वे भी हरियाणा के हैं और जिनका सर्वे किया गया वे भी हरियाणा के हैं। यह पूरे हरियाणा की साख का सवाल है। इसमें किसी तरह की खामी की आशंका बहुत कम है लेकिन जांच जारी है और जांच रिपोर्ट में सब कुछ साफ हो जाएगा।