Researchers have discovered a species of mosquitoes, which will now cure dengue
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आप सब जानते हैं कि एक कहावत कही गयी है कि लोहे को लोहा काटता है। और इस कहावत को सच किया ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ता ने। जी हां यह माना जाता है कि एडीज मच्छर को डेंगू वायरस का कारक है, पर देखा जैए तो ऑस्ट्रेलिया के एक शोधकर्ता ने मच्छरों की एक ऐसी प्रजाति खोजी है जो डेंगू को रोकने में सही साबित हुई है। और ऐसा कहा जा रहा है कि यह जीका वायरस को भी रोकने में भी सहायता कर सकती है। शोधकर्ताओं को एक विशेष प्रकार की मच्छरों की प्रजाति मिली जो इन जानलेवा वायरसों को फैलने से रोकती है। दरअसल यह प्रजाति नेचुरल रूप से पाने वाले वाल्वोबैक्टीरिया वाहक है। यह वायरसों का फेलने से रोकता है।
आपको बता दे कि ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में चार साल तक किए गए परीक्षण के बाद इन मच्छरों पर डेंगू की कोई भी समस्या नहीं आयी। ऑस्ट्रेलिया में इस सफल प्रयोग के बाद इन मच्छरों को इंडोनेशिया और जीका वायरस के लिए अब ब्राजील रियो डे जेनेरियो में परीक्षण कर रहे हैं। वहीं मोनाश विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया में विश्व मच्छर प्रोग्राम के निदेशक ओ नील ने कहा कि रियो की जनसंख्या ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले छह गुना अधिक है और उसकी क्षेत्रफल भी दो गुना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में महामारी का रूप डेंगू और जीका लेते हैं। तो इनको रोकने के लिए यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो यह हमारे लिए बहुत अच्छा है। दरअसल रियो दुनिया का एक ऐसा स्थान है, जहां यदि परीक्षण सफल हो गया तो इसे पूरी दुनिया में सफल माना जाएगा।
वहीं शोधकर्ता का कहना है कि अगर लंबे समय के परीक्षण के बाद वोल्बौकिया सही साबित होती है तो इसको मलेरिया को रोकने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। जर्मनी के भारतवंशी वैज्ञानिक डॉक्टर प्रज्ज्वल नांदेकर ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर मनुष्य के शरीर में मलेरिया फैलाने वाले रोगाणु के तेजी से बढ़ने के कारण की खोज की है। और इस शोध से उम्मीद बढ़ गई है कि मलेरिया का सटीक इलाज मिल जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मलेरिया होने का कारण प्लाजमोडियम परजीवी है जो संक्रमित मच्छरों के द्वारा माध्यम से मनुष्य के शरीर में पहुंचता है। जिसके पश्चात यह लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने लिए परजीवी मरीज के लिवर में तेजी से बढ़ता है। गौरतलब है कि दुनियाभर में चार लाख मौत होने का कोरण मलेरिया होता है। सिर्फ भारत में लगभग 13 लाख लोग इससे परेशान हैं।
नांदेकर का कहना है कि मनुष्य और परजीवी में मौजूद एक्टिन एसिडड की सरंचना एकदम अलग होती है। ये कई सारे अणु को एक साथ करके परजीवी में लंबी रस्सी के जैसे संरचना बना लेते हैं। जिसके कारण परजीवी काफी तेजी से मनुष्य के शरीर में पहुंचकर फैलता है। और इन रोगों के बढ़ने का कारण जानने के लिए मलेरिया का इलाज ढूढ़ा जा रहा है और यह उनका पहला कदम है। इस शोध के बाद परजीवी को रोकना व मलेरिया के इलाज की नयी दवाएं बन सकेगीं।